चुनावों में कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्यवाही

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समाचार गेट/ब्यूरो

फरीदाबाद। जिला निर्वाचन अधिकारी विक्रम सिंह ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की हिदायतों के अनुसार आम लोकसभा चुनाव-2024 में कानूनों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। जिला निर्वाचन अधिकारी विक्रम सिंह ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में आदर्श आचार संहिता की पालना सुनिश्चित करने के लिए जो लोगों नियमों की उलंघना करते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ स्पष्टीकरण जारी करके आयोग के निर्देश पर आरपी अधिनियम 1950, आरपी अधिनियम 1951 और भारतीय दंड संहिता में प्रावधान हैं, जो चुनावों के संबंध में चुनावी अपराधों के लिए मतदाता सूची में या किसी भी प्रविष्टि को शामिल करने या बाहर करने के संबंध में झूठी घोषणा करने के संबंध में अपराधों से जुड़े हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ तुरंत कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।  

जिला निर्वाचन अधिकारी विक्रम सिंह ने कहा कि मतदाताओं और प्रसाशन को आपसी सहयोग से मिलजुल कर आम लोकसभा चुनवा-2024 को सफल बनाना है और किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़नी है। उन्होंने चुनाव के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि प्रावधानों का किसी भी प्रकार का कोई भी उल्लंघन प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत दंडनीय है। इसके लिए चुनाव अधिकारियों ईआरओ, आरओ और डीईओ को गैर-संज्ञेय अपराध के मामले में सक्षम न्यायालय के समक्ष शिकायत दर्ज करके और एफआईआर दर्ज करवाकर ऐसे अपराधों के दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें। इसके अलावा यदि कोई गैर-संज्ञेय अपराध पाया गया है, तो मुखबिर/शिकायतकर्ता सीआरपीसी की धारा 155(1) के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क करें। उसके बाद, मजिस्ट्रेट धारा के तहत स्वतंत्र रूप से कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध के संबंध में यह है जानकारी

जिला निर्वाचन अधिकारी विक्रम सिंह ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में आदर्श आचार संहिता के अधिनियम धारा -188 के तहत दंडनीय अपराध के संबंध में हालांकि यह संज्ञेय अपराध है, मेन या फ्लाईन डास्टा सीआरपीसी की धारा 154(1) के तहत पुलिस द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी, लेकिन, पंचनामा में धारा 154(1) के तहत धारा 188 के तहत भी शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती है, लेकिन पंचनामा में अपराध की धारा 188 के तहत कोई भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। अंतः गवाहों की संख्या, भारत के चुनाव आयोग द्वारा प्रदत्त शक्ति के आधार पर और उसके बाद, भारत के चुनाव आयोग के सदस्यों को सीआरपीसी की धारा 200 के साथ पढ़ने वाली धारा 2 (डी) के तहत याचिका दर्ज करने के लिए अधिकृत किया जा सकता है। सीआरपीसी की धारा 195(1)(ए)(iii) के अनुसार मजिस्ट्रेट के सममूल्य पर आधारित या फिर मजिस्ट्रेट डेमोक्रेसी ले सकता है और सीआरपीसी की धारा 204 के तहत प्रक्रिया जारी कर आदेश जारी कर सकता है।

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