रामनवमी पर रामेश्वरदास मंदिर में आयोजित हुआ धार्मिक मेला

0

City24news@सुनील दीक्षित 
कनीना | उत्तर भारत के प्रसिद्व रामेश्वरदास मंदिर ब्राह्मणवास नो में बुधवार को रामनवमी के उपलक्ष्य में धार्मिक मेले व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें हरियाणा,राजस्थान,हैदराबाद,दिल्ली,छत्तीसगढ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रधालुओं ने हिस्सा लिया। मंदिर ट्रस्ट के प्रधान सुरेश केडिया ने बताया कि चैत्र नवरात्र के दौरान लगातार 9 दिन तक यहां पर हवन-पूजन सहित धार्मिक अनुष्ठान चला। जिसमें लाखों श्रधालुओं ने महाराज रामेश्वरदास मंदिर के दर्शन कर मनोति मांगी। दूर-दराज से आने वाले भक्तों को मंदिर ट्रस्ट की ओर से प्रसाद वितरित किया गया। उन्होंने बताया कि देशभर में यह पहला मंदिर जहां जहां रूपया-पैसा चढाने की मनाही की गई है। माना जाता है कि महाराज रामेश्वरदास के तीन सूत्र थे जिनमें से पहला जीव की सवारी नहीं करने का संदेश देते थे, दूसरा रूपये-पैसे से कोई मोह नहीं था तीसरा समाज के धन्नासेठों की बजाए भगवान से समृधि की कामना करते थे। रूपये-पैसे न चढाने के लिए मंदिर की दीवारों पर बडे अक्षरों में लिखवाया गया है। मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत 300 बीघा जमींन है जिसमें से 11 बीघा भूमि पर भव्य मंदिर,कीर्तन हाॅल,गौशाला, अन्नपूर्णा क्षेत्र, तस्वीरें तथा भंडार गृह बनाए गए हैं,20 बीघा में गायों के लिए हरा चारा उगाया जाता है, शेष भूमि बंजर के रूप में है। पानी की किल्लत होने के वजह से खेती करना संभव नहीं है। मंदिर ट्रस्ट के प्रधान सुरेश केडिया ने बताया कि हरियाणा व राजस्थान की सीमा से सटे इस प्रसिद्य मंदिर में वर्षभर में अनेक समारोह का आयोजन किया जाता है। रामनवमी के अलावा, गुरूपूर्णिमा, मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को महाराज की पुण्यतिथि,गोवर्धन पर्व,जन्माष्टमी पर्व पर विशाल समारोह का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शंकर का अभिषेक किया जाता है। समारोह में सुरक्षा को लेकर हरियाणा पुलिस के निजामपुर चैकी तथा पुलिस लाईन से पुलिस कर्मचारियों को तैनात किया जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर के प्रति श्रधालुओं की अगाध आस्था है। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात्री 8 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में आयोजित समारोह में मामचंद शास्त्री, सागरमल शर्मा, पंडित फांउडेशन के प्रधान हनुमान भारद्वाज,लक्ष्मण शास्त्री, जयराम भंडारी, रमेशचंद चंदेला, महाराज भातादास सहित अन्य मोजिजान नागरिकों का सहयोग रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *