गीता का संदेश संपूर्ण विश्व के लिए मार्गदर्शक – अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप सिंह मलिक
– अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की कड़ी में दूसरे दिन राधा-कृष्ण एवं गीता पर आधारित धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के अंतर्गत जिला नूंह में आज दूसरे दिन भव्य सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। समारोह में अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप सिंह मलिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा गीता श्लोकों के मधुर उच्चारण के बीच उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि गीता सम्पूर्ण विश्व को धर्म, कर्तव्य, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करती है। सदियों से गीता मानवजाति को जीवन का वास्तविक सार सिखाती आई है। उन्होंने बताया कि मनुष्य के मन में प्रतिदिन 40–50 हजार विचार उत्पन्न होते हैं, परंतु उनमें से केवल कुछ ही विचार कर्म रूप में परिणत होते हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में ले जाए और फल की चिंता किए बिना निरंतर कर्म करता रहे—यही गीता का मूल संदेश है।
उन्होंने कहा कि इन्द्रियों पर नियंत्रण और नैतिक मूल्यों का पालन मानव जीवन को सही दिशा देता है। मनुष्य पंचतत्व से निर्मित है और उसकी इन्द्रियां उसकी शक्ति भी हैं और चुनौती भी। यदि मनुष्य इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं रखता, तो वही इन्द्रियां उसे नियंत्रित करने लगती हैं। अतः आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति अनुशासन, संयम, आत्म-नियंत्रण और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाए।
अतिरिक्त उपायुक्त ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जीवन में कम से कम एक कौशल अवश्य विकसित करें, क्योंकि कौशल ही व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि “सत्यमेव जयते” का सार हमें यह सिखाता है कि यदि कोई व्यक्ति गलत है—चाहे वह निकट संबंधी ही क्यों न हो—उसके गलत कार्य का समर्थन नहीं करना चाहिए। हमें सदैव सत्य का साथ देना चाहिए।
समापन में उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने धर्म, अर्थात् अपने कर्तव्य, का पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ पालन करने का आग्रह किया।
अतिरिक्त उपायुक्त ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन
इससे पहले अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप सिंह मलिक ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक स्टाल पर जाकर उनके विभाग से संबंधित स्कीमों की जानकारी ली और कहा कि गीता जयंती समारोह में आने वाले सभी लोगों को विभागीय स्कीमों की जानकारी दी जाए। उन्होंने जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक के स्टॉल पर कहा कि आप इस स्टाल पर आने वाले लोगों के ऑनलाइन खाता मौके पर ही खोलना सुनिश्चित करें ताकि प्रदर्शनी का सही उद्देश्य सफल हो।
जिला बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान समन्वयक डॉ. कुसुम मलिक ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च विचार ही हमारे कर्मों को धर्म का रूप देते हैं। योगेश्वर श्रीकृष्ण का संदेश यही है कि जीवन केवल भोग या भौतिक उपलब्धियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें योग, आत्म-अनुशासन और आध्यात्मिक संतुलन भी शामिल हो।
उन्होंने कहा कि जब आध्यात्मिकता और कर्मठता का सही मेल होता है, तो जीवन में सफलता, स्थिरता और सार्थकता प्राप्त होती है। सरल शब्दों में, कर्म में नैतिकता, प्रयासों में आध्यात्मिक दृष्टि और व्यक्तिगत मेहनत में परमार्थ का भाव—यही सच्ची सफलता का मूल मंत्र है।
डॉ. मलिक ने सभी से आग्रह किया कि गीता का संदेश केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर निर्णय में अपनाने का मार्ग है। जब हम अपने काम को निष्ठा, उद्देश्य व नैतिकता से जोड़ते हैं, तभी व्यक्ति, समाज व संस्थाएं—तीनों आगे बढ़ते हैं।
समाजसेवी प्रेमनाथ नागपाल ने भी गीता सार व कर्म के संदेश के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
गीता जयंती महोत्सव में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नूंह के विद्यार्थियों के गीत के बोल, छोटी-छोटी गईया, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटो सो मेरो मदन गोपाल गीत पर नृत्य की प्रस्तुति दी।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय तावड़ू की छात्राओं ने – देशा में देश भारत, भारत में हरियाणा, हिंदू विद्या निकेतन स्कूल नूंह की छात्राओं द्वारा महाभारत पर आधारित लघु नाटिका, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नूंह की छात्राओं ने गीत नट-नट यमुना तट पर शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। इसके अलावा लोक कलाकारों ने अपनी धार्मिक भजनों की प्रस्तुति से सभी झूमने पर मजबूर कर दिया।
इस अवसर पर महेश मलिक, दिनेश नागपाल, गोपाल पंडित, नरेश डागर आदि भी उपस्थित रहे।
