सरकार अदालत के आदेशों से भाग रही है, कर्मचारी अब सड़कों पर उतरेंगे।

0

-जिला मुख्यालय पर कच्चे व पक्के कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन।
City24News/अनिल मोहनिया

नूंह | हरियाणा सरकार द्वारा माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों को लागू न किए जाने के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय नूंह पर सभी कच्चे एवं पक्के कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा के आह्वान पर किया गया, जिसमें हजारों कर्मचारियों ने भाग लिया। कर्मचारियों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।

सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा के जिला प्रधान समून खान, जयकुंवार दहिया, निसार अहमद, नानक चंद्र, योगराज दीक्षित एवं विजेंद्र सिंह ने संयुक्त बयान में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 23 दिसंबर 2025 एवं 31 दिसंबर 2025 को कच्चे कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए ऐतिहासिक और स्पष्ट आदेशों के बावजूद हरियाणा सरकार जानबूझकर उन्हें लागू नहीं कर रही है। यह सरकार की टालमटोल की नीति और न्यायालय की अवमानना को दर्शाता है।

नेताओं ने कहा कि ग्रामीण चौकीदार, आशा वर्कर्स एवं मिड-डे मील कर्मचारियों को आज तक कर्मचारी का दर्जा तक नहीं दिया गया। सरकार कभी डबल बेंच में जाने की बात करती है तो कभी सुप्रीम कोर्ट की आड़ लेकर न्यायालय के आदेशों को निष्प्रभावी करने का प्रयास करती रही है, जो कर्मचारियों के साथ सीधा विश्वासघात है।

जिला प्रधान समून खान, नानक चंद्र, जयकुंवार दहिया, निसार अहमद एवं इमरान खान ने बताया कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वर्ष 1993, 1996, 2003 एवं 2011 की नीतियों के अंतर्गत आने वाले सभी कच्चे कर्मचारियों को नियमित किया जाए तथा 31 दिसंबर 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके सभी कर्मचारियों को पद सृजित कर नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। साथ ही वेतन निर्धारण एवं एरियर भुगतान के भी स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद सरकार की चुप्पी यह साबित करती है कि वह शोषण आधारित व्यवस्था को बनाए रखना चाहती है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब सरकार ने न्यायालय के फैसलों को नजरअंदाज किया हो। वर्ष 2017 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मैस वर्करों के पक्ष में आए फैसले को भी आज तक लागू नहीं किया गया। इससे साफ है कि सरकार की नीति न्याय देने की नहीं, बल्कि फैसलों को लटकाने और कर्मचारियों को थकाने की रही है।

सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पीडब्ल्यूडी, नगर निकाय, बोर्ड-निगम, विश्वविद्यालय, कौशल विभाग, मिड-डे मील, पार्ट-टाइम, अनुबंध, गेस्ट, आउटसोर्स, एससीईआरटी, शिक्षा बोर्ड सहित सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस आंदोलन में एकजुट रहें। 19 जनवरी 2026 को जिला स्तर पर हुए इस विशाल प्रदर्शन में कर्मचारियों की व्यापक भागीदारी रही।

नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल नियमितीकरण का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का है। यदि सरकार ने अब भी उच्च न्यायालय के आदेशों को लागू नहीं किया, तो 12 फरवरी 2026 को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हरियाणा का कर्मचारी वर्ग पूरी ताकत के साथ भाग लेगा और आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

वक्ताओं ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसके नाम पर यह भ्रम फैलाया गया कि यह कोई सरकारी योजना है, जबकि वास्तविकता में यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जो सरकार और कर्मचारियों के बीच निजी दलाल की तरह कार्य कर रही है। इसका सरकार की नीतियों से कोई सीधा संबंध नहीं है। कर्मचारियों को इसके पोर्टल में नाम अपलोड होने या न होने के भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि न्यायालय की भावना और आंदोलन के दबाव में प्राइवेट कंपनी की अस्थायी व्यवस्था के बजाय सरकारी विभागों में स्थायी कर्मचारी बनने के लिए संघर्ष करना चाहिए।

इस प्रदर्शन में दीपक प्रधान तावडू, असलम प्रधान पुनहाना, प्रकाश चंद्र नूंह, आरिफ खान नगीना, देवेंद्र (बिजली प्रधान नूंह), जयसिंह चौहान (सचिव रोडवेज नूंह), नानक चंद्र (ग्रामीण सफाई कर्मचारी), इमरान खान (ग्रामीण चौकीदार), सुभाष (प्रधान नगर पालिका नूंह), रफीक अहमद (सिंचाई विभाग), विजेंद्र सिंह (प्रधान मेवात मॉडल स्कूल) सहित नफीस, सलीम, सतीश, लिखिराम, इल्यास खान, मुकेश (झिरका), मामचंद (तावडू) एवं अन्य हजारों कर्मचारियों ने भाग लिया।

अंत में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा—

“अब आर-पार की लड़ाई है, या तो न्याय मिलेगा या आंदोलन और तेज होगा।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *