पुन्हाना में बिना भवन के चल रहा वन विभाग का कार्यालय
-कार्यालय के निर्माण के लिए 38 लाख की मंजूरी के बावजूद निर्माण अधर में, चार दीवारी व गेट के लिए अलग से मंजूर हुए 24 लाख
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | पुन्हाना शहर में वन विभाग का कार्यालय पिछले करीब डेढ़ वर्ष से बिना भवन के संचालित हो रहा है। विभागीय कार्य अस्थायी व्यवस्था के सहारे चलाए जा रहे हैं, जिससे न केवल कर्मचारियों को परेशानी हो रही है, बल्कि आम लोगों को भी जरूरी कामों के लिए भटकना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि नए भवन के निर्माण के लिए सरकार की ओर से पहले ही करीब 38 लाख रुपये की राशि मंजूर की जा चुकी थी, लेकिन किसी कारणवष इसका टेंडर प्रकिया पूरी नहीं हुई जिसके कारण राषि वापिस सरकार के खाते में चली गई।
फिलहाल कार्यालय में रखे रिकॉर्ड नूंह कार्यालय में रखे हुए है तो विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मोबाइल कार्यालय चलाने की बात कह रहे है।
जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले वन विभाग के पुराने जर्जर भवन को गिरा दिया गया था। भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बाद विभाग की ओर से नए भवन के निर्माण का प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा गया। प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई और लगभग 38 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई। उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों में नए भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन अब तक इसका निर्माण कार्य षुरू नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वीकृति मिलने के बावजूद अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया को समय पर आगे नहीं बढ़ाया। इसी कारण राशि होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। समय बीतने के साथ मंजूर की गई राशि वापस सरकार के खाते में चली गई। खाली जमीन पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है जहां पर अवैध गतिविधियां होती है।
इधर, हाल ही में वन विभाग की जमीन की चारदीवारी और गेट के लिए करीब 24 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। इस फैसले ने स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि जब कार्यालय के लिए भवन ही नहीं है, तो पहले चारदीवारी और गेट पर इतना बड़ा खर्च करना समझ से परे है।
स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि 24 लाख रुपये की राशि में कम से कम तीन से चार कमरों का एक साधारण कार्यालय भवन आसानी से बनाया जा सकता है, जिससे विभाग का कामकाज सुचारू रूप से चल सके।
स्थानीय सामाजिक भोलीराम दिवाकर, सिराज, धनसिंह, षिवपूजन, सफी मोहम्मद कार्यकर्ताओं का कहना है कि वन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग का कार्यालय बिना भवन के चलना सरकार और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है। वन संरक्षण, पौधारोपण, अवैध कटान पर रोक और आम लोगों की शिकायतों का निपटारा जैसे कई अहम कार्य इसी कार्यालय से जुड़े हैं। भवन न होने के कारण न तो रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा पा रहे हैं और न ही कर्मचारियों को बैठने की उचित व्यवस्था मिल पा रही है। कई बार स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी आकर्षित किया, लेकिन अभी तक ठोस समाधान नहीं निकल सका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता, तो आज कार्यालय का नया भवन बनकर तैयार हो चुका होता।
इदरीश खान, डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर ने बताया कि गत वर्ष फरवरी माह में कार्यालय के भवन निर्माण के लिए राशि मंजूर हुई थी लेकिन मार्च में वन विभाग के अधिकारी के सेवानिवृत होने के कारण टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। दो माह के समय में पूर्ण रूप से कार्यालय का निर्माण नहीं हो सकता था जिसके बाद मंजूर की गई राशि वापिस चली गई। विभाग की ओर से दोबारा से इसका प्रपोजल तैयार कर भेजा गया है , उम्मीद है कि जल्द ही राशि मंजूर होने के बाद इस पर काम शुरू कराया जाएगा।
