शिविर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवकों के योगाभ्यास से आरंभ की गई, जिसमें खण्ड विकास अधिकारी विशाल आजाद ने बच्चों को योगाभ्यास कराते हुए शिविर में सिखाए गए योग को अपने जीवन में अपनाने बारे उद्बोधन किया।
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | समापन समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में जिला एनएसएस अधिकारी मास्टर अशरफ खान को आमंत्रित किया गया। मुख्य वक्ता अशरफ खान ने स्वयंसेवकों को उद्बोधन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना में रहते हुए निस्वार्थ भाव से समाज हित में कार्य करना की एक सच्ची सेवा है। किसी लाभ, लालच और किसी की पाने की लालसा में की गई सेवा का जीवन में कोई महत्व नहीं होता। सरकारी तंत्र में, प्राइवेट एजेंसियों में एक सर्विस शब्द का उपयोग होता है सर्विस का अर्थ भी सेवा होती है लेकिन वहां काम करने की एवज में हमें एक तनख्वाह और महंतनामा मिलता है इसलिए हम इस तनख्वाह और मेहनत के लिए काम करते हैं अतः ऐसी सर्विस को सेवा नहीं कहा जा सकता।सेवा का अर्थ ही निस्वार्थ सेवा करना होता है।उन्होंने कहा कि भरे हुए पेट को रोटी खिलाना भी सेवा नहीं है।समाज से अपेक्षित, भूख से पीड़ित एवं खाने से वंचित लोगों की सेवा ही निस्वार्थ सेवा होती है।अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किए गए काम को सेवा मानना गलत है, राष्ट्रीय सेवा योजना में रहते हुए हमें यही सीखने की आवश्यकता है कि किस तरह हम निस्वार्थ सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं। अगर देश का हर व्यक्ति निस्वार्थ सेवा में विश्वास रखें और उस पर कायम रहे तो देश अपने आप बदलने की राह पर चल पड़ेगा।
एनएसएस अधिकारी नरेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर बच्चों को ले जाना हमारे स्कूल का कर्तव्य है और इसी प्रयास में इस स्कूल सात दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया और भविष्य में भी राष्ट्रीय सेवा योजना केंद्र को स्कूल की ऐसी गतिविधियां चलाने में उनका पूरा योगदान रहेगा।
शिविर के समापन समारोह में सभी उपस्थित कार्यक्रम अधिकारी स्कूल प्राचार्या सत प्रकाश, रजमल खान, आदि को विशेष सम्मान स्मृति चिन्ह देकर उनका शिविर में किए गए योगदान के लिए धन्यवाद किया गया।
शिविर के दौरान स्वयंसेवकों के लिए बहुत सारी प्रतियोगिताएं की गई एवं इन प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान स्वयंसेवकों को प्रकार से पुरस्कृत किया गया।
एनएसएस अधिकारी नरेश कुमार ने शिविर के समापन में स्वयंसेवकों को उद्बोधन करते हुए कहा कि 7 दिनों के अंदर हमने एक परिवार बनाया और परिवार के सदस्य के रूप में एक दूसरे का साथ दिया जिसके लिए उनका सभी विद्यार्थियों से एवं कार्यक्रम अधिकारियों से धन्यवाद किया।
