सतयुग दर्शन ट्रस्ट द्वारा मानवता के पुनरुत्थान हेतु भाव–स्वभाव परिवर्तन क्रांति का प्रेरणादायक आयोजन

City24News/ओम यादव
फरीदाबाद | नववर्ष के पावन अवसर पर मानव जीवन में स्थायी, सकारात्मक और भाव स्वभाव परिवर्तन का संदेश देते हुए सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि.), फरीदाबाद द्वारा 18 जनवरी 2026 को सतयुग दर्शन वसुंधरा परिसर में “भाव–स्वभाव परिवर्तन क्रांति” कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन में सतयुग दर्शन ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित सभी संस्थानों—सतयुग दर्शन विद्यालय, सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र, सतयुग दर्शन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी तथा सतयुग दर्शन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च में अध्ययनरत विद्यार्थियों व उनके अभिभावक उत्साहपूर्वक शामिल हुए ।
कार्यक्रम में प्रस्तुत विचारों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि स्थायी भाव-स्वभाविक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है, और वही परिवर्तन परिवार, समाज तथा अंततः राष्ट्र में समभाव, शांति व एकता का आधार बनता है। इस कार्यक्रम में सतयुग दर्शन के विद्यार्थियों ने भाव-स्वभाव परिवर्तन हेतु दानवता के प्रतीक कलियुगी भाव स्वभाव त्याग दिव्यता के प्रतीक सतयुगी भाव स्वभाव अपनाने के विषय में प्रेरणादायक प्रस्तुतियाँ दीं।
सतयुग दर्शन ट्रस्ट ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान कलयुगी परिवेश में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तनाव और नैतिक मूल्यों के क्षरण से उबरने हेतु “भाव–स्वभाव परिवर्तन क्रांति” एक अनिवार्य सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है। ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने भाव स्वभाव परिवर्तन क्रांति कार्यक्रम के अंतर्गत बताया कि “हर मानव के तीन अस्तित्व होते हैं—आत्म अस्तित्व, मानसिक अस्तित्व और भौतिक अस्तित्व और आत्मज्ञान ही आत्म अस्तित्व की यथार्थ पहचान का एकमात्र साधन है। इसीलिए हर मानव के लिए बनता है कि वह अपने स्वरुप का ज्ञान प्राप्त करने हेतु अपने ख्याल ध्यान को हर क्षण अलौकिक आत्मस्वरूप में साधे रख अपने मन-वचन-कर्म द्वारा जो कुछ भी करे सत्य-धर्म अनुकूल निष्काम भाव से करते हुए कर्म गति से स्वतंत्र रह परमात्म नाम कहाएं।
ऐसा सुनिश्चित करने हेतु हर इंसान के लिए बनता है कि अपने मानसिक यानी मन – संबंधित अस्तित्व व भौतिक सृष्टि यानी शारीरिक अस्तित्व से अपने ख्याल ध्यान को ऊपर उठा आत्म अस्तित्व में स्थित कर अपनी वृत्ति, स्मृति, बुद्धि व स्वभावों का ताना बाना समरसता से निर्मल अवस्था में साधे रखते हुए विशुद्धता के प्रतीक बन जाए।
कार्यक्रम के अंतर्गत अभिभावकों को सतयुग दर्शन वसुंधरा परिसर स्थित विश्व के प्रथम समभाव-समदृष्टि के स्कूल ‘ध्यान-कक्ष’ का विशेष मार्गदर्शन सहित भ्रमण भी कराया गया। उल्लेखनीय है कि यह ध्यान-कक्ष भारत सरकार द्वारा ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ में सम्मिलित एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है, जहाँ से आत्मिक ज्ञान की पढ़ाई का निरंतर प्रवाह ऑनलाइन व ऑफलाइन कक्षाओं द्वारा नित्यप्रति चल रहा है जिससे कोई भी निःशुल्क सतयुग दर्शन ऐप द्वारा जुड़ सकता है।
इस अवसर पर अभिभावकों से करबद्ध प्रार्थना करते हुए ट्रस्ट ने आह्वान दिया कि यदि इस क्रांति के सद्प्रभाव से उनके भीतर भी कलियुग के नकारात्मक कलुषित भाव स्वभाव त्याग सतयुग के निर्मल भाव स्वभाव यानी एक सदाचारी, सज्जन और समभावी मानव बनने की उत्कंठा जागृत हुई है, तो वे पारिवारिक व सामाजिक एकता के तहत् अपने परिवार तथा समाज के प्रत्येक सदस्य को साथ लेकर, पूरे विश्वास और निष्ठा के साथ आत्मसुधार के इस पावन मार्ग पर आगे बढ़ें और मानवता का स्वाभिमान व सतयुग की पहचान बन जाए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री राजेश सिंह (डीजीएम–एचआर, शाही एक्सपोर्ट्स), श्री राजपाल जी (जनरल मैनेजर, सूरजकुंड), श्री कमलेश शास्त्री (मंडल बाल विकास अधिकारी), डॉ. जयश्री चौधरी (निदेशक, उड़ान आईएएस संस्थान), श्री राजेश चंद जी (उप अधीक्षक, जिला शिक्षा कार्यालय, फरीदाबाद) एवं श्री प्रवेश कटारिया जी (खंड शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सतयुग दर्शन ऐप के माध्यम से भी किया गया, जिससे दूरस्थ दर्शकों ने भी इस प्रेरणादायक पहल से जुड़कर लाभ प्राप्त किया।
अंत में ट्रस्ट ने सभी से आग्रह किया कि बुराई से अच्छाई की ओर बढ़ते हुए समभाव और समदृष्टि को जीवन का आधार बनाकर एक शांत, समरस और मानवीय संसार की नींव रखें।
