कनीना मंडी में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन हुआ भगवान के अवतारों का वर्णन

-कथा के पठन व श्रवण से होती है मोक्ष की प्राप्ति-पंडित रासबिहारी
City24News/सुनील दीक्षित
कनीना | कनीना मंडी स्थित विश्वकर्मा धर्मशाला में चल रही सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन भगवान नारायण व श्री कृष्ण के अवतारों का वर्णन किया गया। इस कथा का शुभारंभ शुक्रवार को कलश एवं शोभायात्रा के बाद किया गया था। कथा में अशोक गुप्ता सपत्नीक यजमान की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मकर सक्रांति पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित इस कथा का 15 जनवरी को सुबह सवा नो बजे हवन एवं प्रसाद वितरण के बाद समापन किया जाएगा। कथा का वाचन पंडित रामबिहारी द्वारा दोपहर एक बजे से सायं चार बजे तक किया जा रहा है। उन्होंने कथा में बताया कि श्रीमद् भागवत कथा, भागवत पुराण हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें मुख्य रूप से भगवान नारायण और श्रीकृष्ण के अवतारों का वर्णन है, जिसे भक्ति योग, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग माना जाता है। यह कथा शुकदेव मुनि द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई थी, जिन्होंने इसे महर्षि वेदव्यास से सुना था, और इसमें कई प्रेरक उपाख्यानों का अद्भुत संग्रह है। यह कथा आत्मा की शुद्धि, पाप मुक्ति और ईश्वर की कृपा पाने का एक दिव्य माध्यम मानी जाती है, जिसे 7 दिनों या अन्य निर्धारित अवधियों में सुना-पढ़ा जाता है।
कथा का सार और महत्व
कथा में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, यथा राम, कृष्ण और उनकी लीलाओं का विस्तृत वर्णन है, जो भक्तों को आनंद और ज्ञान देते हैं। यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के सिद्धांतों का समन्वय करता है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। परम्परागत रूप से इसे महर्षि वेदव्यास द्वारा रचा गया माना जाता है, और शुकदेव मुनि ने इसे राजा परीक्षित को सुनाया था। सुकेदव मुनि कह सुनो परीक्षित समय बडा बलवान प्रेम से धरो हरि का ध्यान’ पर केंद्रित है। इसमें भक्त प्रहलाद की कथा, गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन, मनु-वंश और अन्य कई शिक्षाप्रद कहानियाँ शामिल हैं।
कथा की उत्पत्ति
ऋषि श्रृंगी के श्राप के कारण, राजा परीक्षित को सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से मृत्यु का श्राप मिला था। अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा करते हुए, उन्होंने गंगा किनारे बैठकर शुकदेव मुनि से अपने कल्याण का मार्ग पूछा। शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे राजा परीक्षित को परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान के स्वरूप, लीलाओं और परम सत्य के ज्ञान का वह अमृत है, जो जीवन को पवित्र कर मोक्ष की ओर ले जाता है। इस मौके पर व्यापार मंडल के प्रधान पूर्णचंद सहरावत, राजसिंह उन्हाणी, सुरेश सेठ, वेद प्रकाश जांगिड़ सहित प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
कनीना-श्रीमदभागवत कथा सुनाते आचार्य रासबिहारी तथा कथा का श्रवण करती महिलाएं।
