नूंह में मकर संक्रांति पर्व हवन सत्संग करके मनाया।
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | आर्य समाज मंदिर नूंह में मकर संक्रांति पर्व हवन सत्संग करके मनाया आचार्य राजेश ने बताया कि मकर संक्रांति सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है, जो प्रकृति, सूर्य उपासना और मानव जीवन के बीच संतुलन को प्रदर्शित करता है। यह त्यौहार भारत के विभिन्न प्रदेशों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल तथा असम में माघ बिहू के नाम से जाना जाता है। नाम चाहे अलग हों, लेकिन इस पर्व का मूल भाव एक ही है, और वह है; सूर्य देव की उपासना और दान-पुण्य करना।
आचार्य राजेश ने कहा कि
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मनाया जाता है। यह वह क्षण होता है, जब सूर्य उत्तरायण होते हैं और खरमास के बाद शुभ काल आरंभ होता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय आत्मशुद्धि और पुण्य अर्जन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। सामान्यत: भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियां चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किन्तु मकर संक्रान्ति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। हवन सत्संग में सुरेश चन्द आर्य, ज्ञानचंद आर्य, यजमान नरेन्द्र आर्य, मास्टर जयभगवान, मास्टर सुरेश, मास्टर शेर सिंह, मास्टर भजनलाल, सुरेश वर्मा, सुनील, सौरभ गर्ग, नितिन सिंगला,शशि बाला,वन्दना, रेणु बाला आदि उपस्थित रहे।
