मेवात में फिर जगी इंसानियत: बड़कली चौक पर शुरू हुई “नेकी की दीवार”
-मेवात आरटीआई मंच की पहल से जरूरतमंदों को मिलेगा मुफ्त कपड़ों का सम्मानजनक सहारा
-गरीबों के लिए उम्मीद की दीवार
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | मेवात की राजधानी कहे जाने वाले बड़कली चौक पर रविवार को इंसानियत और सामाजिक सरोकार की एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली, जब मेवात आरटीआई मंच के तत्वावधान में और “नेकी की दीवार – गरीबों की मददगार” अभियान के संयोजक राजूद्दीन के नेतृत्व में इस मानवीय पहल का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत बड़कली चौक स्थित एक दीवार पर नए और पुराने, लेकिन पूरी तरह उपयोगी कपड़े टांगे गए हैं, ताकि जरूरतमंद लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार उन्हें निःशुल्क ले सकें। इस नेक पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब, मजदूर, बेसहारा या जरूरतमंद व्यक्ति सर्दी, गर्मी या बरसात में कपड़ों की कमी के कारण परेशान न हो। यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति बिना किसी पहचान या औपचारिकता के अपने लिए कपड़े ले सकता है, जिससे उसकी गरिमा और आत्मसम्मान बना रहता है। गौरतलब है कि “नेकी की दीवार” की शुरुआत वर्ष 2012 में नूंह जिले के इसी बड़कली चौक से मेवात आरटीआई मंच और मौजी फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से की गई थी। तब से लेकर आज तक यह अभियान हर वर्ष लगातार चलाया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में समाजसेवी, स्वयंसेवक और आम नागरिक आगे आकर नए और पुराने कपड़े दान करते हैं, जिससे हजारों जरूरतमंदों को राहत मिलती है। संयोजक राजूद्दीन ने बताया कि हर साल सर्दियों से पहले इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाया जाता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक गर्म कपड़े पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल कपड़े बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में भाईचारा, संवेदना और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है। स्थानीय लोगों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहलें समाज को जोड़ती हैं और वास्तव में यह दीवार गरीबों के लिए उम्मीद की दीवार बन जाती है।
