सकट चौथ के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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-श्रद्धा व उल्लास पूर्वक 6 जनवरी को मनाई जाएगी तिल कुटनी चौथ
-रात्री पौने 9 बजे होगा चंद्र दर्शन-ताराचंद जोशी
City24News/सुनील दीक्षित 

कनीना | प्रति वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ, तिल कुटनी चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ किया जाता है। इसे संकट चतुर्थी, तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। ताराचंद जोशी बुहाना ने बताया कि इस दिन विशेष रूप से महिलाएं उपवास रखती है और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि यह व्रत संतान के सुखद, सुरक्षित व उज्जवल भविष्य के लिए अत्यंत फलदायी होता है।
धार्मिक विश्वास के मुताबिक सकट चौथ का व्रत करने से संतान के जीवन में आने वाली बाधाएं और संकट दूर होते हैं। इस दिन गणपति बप्पा की कृपा से घर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। व्रत के दौरान चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। चंद्र देखने के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 2026 में 6 जनवरी मंगलवार को तिलकुट का व्रत मनाया जाएगा। इस दौरान रात्रि को 8-50 बजे चंद्रोदय होगा। उन्होंने बताया कि यह दिन भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना गया है। छह जनवरी को सुबह 8 बजे चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी और 7 जनवरी को सुबह करीब 6-52 बजे तक रहेगी। यह व्रत और पूजा करने से संतान सुख, सौभाग्य और परिवार में सुख-शांति बनी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि बिना चंद्र दर्शन के इस व्रत को पूर्ण नहीं माना जा सकता। पंचांग के अनुसार, जनवरी 2026 को चंद्रमा का उदय रात लगभग पौने 9 बजे होगा। इस समय चंद्र देव को जल, दूध व अक्षत मिश्रित जल से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद ही व्रती  महिलाएं उपवास खोलती हैं। चंद्रमा को चंद्रमा को अर्घ्य देने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और संतान को  भविष्य  का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सकट चौथ के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर महिलाएं व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान को साफ करें ओर चैकी पर भगवान गणेश के प्रतिमा को स्थापित करें। मोदक के लड्डू या तिल-गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाएं। सकट चैथ की व्रत कथा का श्रवण करें।

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