मनरेगा में बदलाव, मजदूरों के हकों को छीनने का प्रयास: आफताब अहमद
-मनरेगा में बदलाव के खिलाफ नूंह में पत्रकार वार्ता
-गांधी पार्क में कांग्रेस का सांकेतिक उपवास
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | मनरेगा में मोदी सरकार द्वारा किए गए बदलावों के खिलाफ कांग्रेस लगातार हमलावर दिख रही है। शनिवार को हरियाणा के नूंह जिले में कांग्रेस विधायकों चौधरी आफताब अहमद, इंजीनियर मामन खान, मोहम्मद इलियास के पुत्र जावेद खान
और कांग्रेस जिला अध्यक्ष चौधरी शहीदा खान, पीसीसी सदस्य चौधरी महताब अहमद आदि ने पत्रकार वार्ता कर बीजेपी पर हमला बोला है।
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि यूपीए सरकार में कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के गरीब मजदूरों को सिर उठाकर स्वाभिमान से जीने का अधिकार दिया था। जिसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम कार्य करना चाहते हैं, को एक वित्त वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटी युक्त मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि अब भाजपा की मोदी सरकार ने इस योजना को समाप्त कर देश के गरीब मजदूरों की आजीविका पर प्रहार किया है और में गरीबों से काम का अधिकार छीना है। कांग्रेस सरकार ने मनरेगा कानून लागू कर गारंटी दी थी कि मांगते ही ग्रामीण क्षेत्र में काम मिलेगा और यदि काम नहीं है तो मानदेय मिलेगा।
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि इससे भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली थी और देश में मजदूरों के पलायन की रोकथाम करने में सहायता मिली थी। लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार ने उद्योगपतियों के दबाव में इस योजना को खत्म करने का कार्य किया है जो कि भारत के गरीब मजदूरों के हितों पर कुठाराघात है। गांधीजी का नाम हटाना उनकी विरासत को मिटाने की कोशिश है क्योंकि गांधीजी ग्राम स्वराज के प्रतीक थे। सिर्फ नाम बदलकर क्रेडिट लेने की मांग है जबकि पहले मोदीजी इसे फेलियर का स्मारक कहते थे। नए नियमों से काम की गारंटी कमजोर होगी।
राज्य सरकारों पर बोझ बढ़ेगा और केंद्रीय नियंत्रण ज्यादा हो जाएगा।
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही 2015 में ही मनरेगा की योजना को बंद करने की साजिश शुरू हो गई थी। इन्होंने मनरेगा का नाम ही नहीं बदला पूरी योजना ही बदल दी है। हरियाणा में 2024 में 8 लाख लोगों ने 100 दिन के काम के लिए रजिस्ट्रेशन किया लेकिन महज 2100 लोगों को ही काम दिया गया। यह इस योजना को कमजोर करने वाला कदम है। 2020- 21 में मनरेगा मजदूरों को औसत साल में 52 दिन काम मिला, 2025- 26 में मात्र 36 दिन। बीते 5 सालों की बात की जाए तो हर साल मजदूरों की संख्या और मजदूरी के दिन कम ही हुए हैं। कांग्रेस पार्टी इस कदम का विरोध करती है। देश के मजदूर भी अब इस सच्चाई को जान चुके हैं।कांग्रेस पार्टी एक महीने तक पूरे देश में इसकी विरोध में कार्यक्रम करेगी और संसद से सड़क तक इस लड़ाई को लड़ा जाएगा।
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि मनरेगा संकट में है क्योंकि हक़ की कमाई के बीस साल अब खतरे में है। 4.5 करोड़ परिवारों को कोविड के मुश्किल समय में रोज़गार मिला। 180 करोड़ से ज़्यादा रोजगार दिवस उपलब्ध हुए। 10 करोड़ से ज़्यादा निर्माण कार्यो को पूरा किया गया।
इंजीनियर मामन खान विधायक ने कहा कि मजदूरों के अधिकार पर हमला हुआ है। पहले हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की गारंटी मिलती थी। हर गांव में काम करने की कानूनी गारंटी मिलती थी। आप पूरे साल काम की मांग कर सकते थे। अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी। काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने हुए गांवों में ही मिल सकेगा। फ़सल कटाई के समय आपको काम नहीं मिलेगा। मोदी सरकार आपकी न्यूनतम मजदूरी अपने अनुसार तय करेगी।
जिला अध्यक्ष हाजी शहीदा खान ने कहा कि पहले आपको आपके ग्राम पंचायत में विकास के लिए ही काम गांव में मिल जाता था और काम में मनरेगा मेट और रोज़गार सहायकों का सहयोग मिलता था। अब आपको कहां और क्या काम मिलेगा ये मोदी सरकार अपने चहेते ठेकेदारों के माध्यम से मनमाने ढंग से तय करेगी और रोज़गार सहायकों का सहयोग भी नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। पहले मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसीलिए राज्य सरकार बिना किसी झंझट के आपको काम उपलब्ध कराती थी। अब राज्य सरकार को आपकी मजदूरी का 40 फ़ीसदी खुद देना होगा इसलिए आपको काम ही नहीं दे, ऐसा भी संभव है। शहीदा खान ने बताया कि आज गांधी पार्क में मनरेगा में बदलाव के खिलाफ सांकेतिक उपवास रहेगा।
वहीं पीसीसी सदस्य चौधरी महताब अहमद ने कहा कि काम की गारंटी बहाल की जाए, मनरेगा में किए गए बदलावों को वापस लिया जाए, न्यूनतम मज़दूरी 400 प्रतिदिन निर्धारित की जाए, पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाया जाए।
जावेद खान एडवोकेट ने कहा कि हम मनरेगा में किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज करते हैं, जो सुनिश्चित रोज़गार और ग्रामीण सशक्तिकरण के उसके मूल उद्देश्य को कमजोर करते हैं। मनरेगा करोड़ों परिवारों के लिए संवैधानिक काम का अधिकार है और इसे किसी भी रूप में कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
हाजी अख्तर काटपुरी ने कहा मजदूरों के साथ कांग्रेस पार्टी खड़ी है और लगातार इस मामले पर संघर्ष कर रही है। मजदूरों को जब तक उनका हक नहीं मिलता तब तक कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा और संसद में लड़ाई लड़ती रहेगी।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता चौधरी शहीदा खान, पूर्व विधायक एवं जिला अध्यक्ष कांग्रेस नूंह ने की।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पूर्व मंत्री एवं विधायक चौधरी आफताब अहमद, विधायक मम्मन खान, चौधरी जावेद एडवोकेट, चौधरी मेहताब अहमद, हाजी अख्तर हुसैन काटपुरी, आसिफ अली (प्रवक्ता), साहुन एडवोकेट, सिराजुद्दीन सिराज, हाजी अब्बास (जयसिंहपुर), मुबारिक मलिक, मकसूद सिकरवा, साजिद सरपंच (रेवासन), अंजुम पार्षद, ओबीसी अध्यक्ष यासीन, शाकिर लहाबास, हाशिम गंगवानी, रफीक गंगवानी, डॉ. उस्मान, डॉ. बिलाल, यूसुफ खान ,नीटू उजीना , शमीम रहेनिया , अल्ताफ़ डीके , शेखावत, दयाराम बंखल सहित अनेक वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
