केवल मनरेगा को नहीं बल्कि गरीब मजदूरों को कमजोर कर रही भाजपा: जितेंद्र बघेल
City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | मनरेगा का नाम बदलने और उसमें कई तरह के बदलाव करने पर कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर है, पार्टी धरने प्रदर्शन कर रही है। गांवों में चौपाल के बाद अब कांग्रेस दूसरे चरण के तहत सिविल सोसायटी और मनरेगा मजदूरों के साथ धरना दे रही है, इसी कड़ी में सोमवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर नूंह के लघु सचिवालय में मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत कांग्रेसियों ने धरना दिया और रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए मनरेगा बचाने के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया। धरना प्रदर्शन करने के बाद जिला उपायुक्त को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
धरना प्रदर्शन में हरियाणा सह प्रभारी जितेंद्र बघेल, चौधरी आफताब अहमद विधायक नूंह, इंजीनियर मामन खान विधायक फिरोजपुर झिरका, जिला अध्यक्ष हाजी शहीदा खान पूर्व विधायक, पीसीसी सदस्य चौधरी महताब अहमद विशेष रूप से मौजूद रहे।
हरियाणा सह प्रभारी जितेंद्र बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार ने ना केवल जानबूझकर मनरेगा का नाम बदला है बल्कि इसका बजट घटाकर और भुगतान रोककर गरीब, दलित, पिछड़े और ग्रामीण मजदूरों को भुखमरी व पलायन की ओर धकेल दिया है। भाजपा सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के कारण गरीबी और बेरोजगारी निरंतर बढ़ रही है।
बता दें कि कांग्रेस ने काम के अधिकार की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान शुरू किया। पार्टी का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘वीबीजीआरएएमजी’ कानून लागू किया है, जिससे काम के अधिकार की वैधानिक गारंटी समाप्त हो गई है।
नूंह विधायक आफताब अहमद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार को महात्मा गांधी नरेगा के नाम से क्या आपत्ति है। इस दौरान हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में मजदूरों के अधिकारों की रक्षा का स्वर गूंजा। इसमें ग्रामीण भारत के रोजगार, मजदूरी और सम्मान की रक्षा के मुद्दे पर जबरदस्त जनसमर्थन देखने को मिला।
सभा को संबोधित करते हुए विधायक आफताब अहमद ने केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना से लगातार छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस योजना को कमजोर किया जा रहा है। विधायक आफताब अहमद ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने संसद में अपने बहुमत के बल पर देश के गरीबों के मुख्य आधार मनरेगा योजना को समाप्त कर उन्हें रोजी-रोटी के लिए बेसहारा कर दिया है। केंद्र की इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने पूरे प्रदेश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ जन आंदोलन शुरू किया है।
आफताब अहमद ने यह भी बताया कि मनरेगा के बजट में कटौती, कार्य दिवसों में कमी और मजदूरी भुगतान में देरी के कारण ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर संकट आ गया है।
विधायक आफताब अहमद का कहना था कि वीबी ग्रामजी एक्ट सीधे तौर पर देश के गरीब मजदूर के जीवन यापन पर प्रहार है। नए एक्ट से ग्रामीणों को तो कोई फायदा नहीं होगा, लेकिन चंद उद्योगपतियों और फैक्ट्री मालिकों को इसका फायदा होगा, उन्हें सस्ते मजदूर मिल जाएंगे, सरकार केवल मनरेगा को नहीं बल्कि गरीबों को ही धराशाही करना चाहती है। इसका अंजाम आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा, ऐसे ही रहा तो एक बार फिर गांव से शहरों की ओर पलायन शुरू हो जाएगा और गांव खाली हो जाएंगे।
जिला अध्यक्ष हाजी शहीदा खान पूर्व विधायक ने इस अवसर पर कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। उन्होंने मनरेगा को मजबूत करने, समय पर रोजगार उपलब्ध कराने और मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
इंजीनियर मामन खान विधायक ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को यूपीए सरकार की अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने वर्ष 2005 में लागू किया था। यह एक अधिकार-आधारित कानून है, जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का अधिकार देता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस ने इसे शहरी क्षेत्रों में भी लागू किया था और 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार प्रदान किया था। कानून के तहत, राज्य सरकार श्रमिक के आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और परिभाषित विशेषता है।
पीसीसी सदस्य चौधरी महताब अहमद ने इस मौके पर कहा कि केंद्र सरकार ने अपने चंद उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए मनरेगा एक्ट को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि गांव से पलायन रोकने और मजदूरों को काम का अधिकार देने के लिए राहुल गांधी की पहल पर यूपीए सरकार यह कानून लेकर आई थी, लेकिन मोदी सरकार को गांव के लोग नहीं, बल्कि अडानी अंबानी चाहिए। अब जो नया एक्ट बना है, उसमें 40 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकारों की होगी। राज्य सरकारें पहले ही आर्थिक बोझ के तले दबी हुई है। ऐसे में वह किस प्रकार सहयोग दे सकेगी।
इस दौरान एडवोकेट जावेद खान, हाजी अख्तर काटपुरी, इब्राहिम इंजीनियर बिसरू, हाजी सुबराती कंवरसीका, उपाध्यक्ष आरिफ लुहिंगा, उपाध्यक्ष इम्तियाज गोकुलपुर, उपाध्यक्ष सोराब मालब, आसिफ चंदेनी, साहिन शम्स, साहून एडवोकेट, मुबीन टेढ़, महेंद्र सिंह (SC सेल अध्यक्ष), मुबारिक मलिक, अंजुम (महासचिव), हाजी खुर्शीद (महासचिव), हासिम गंगवानी (महासचिव), अब्दुल क़ादिर (महासचिव), हैदर (महासचिव), विनय पाल (महासचिव), वहीद सालंबा (महासचिव), शमशेर लुहिंगा (सचिव), तौफीक चिल्ला (सचिव), हाजी अरशद (सचिव), हाजी असगर, तौफीक (सचिव), अशराफ, लियाकत (सचिव), गेंदा खान (सचिव), जुनैद (सचिव), इकरून (सचिव), शाकिर (सचिव), दयाराम (सचिव), प्रदीप (सचिव), हुसैनदीन (सचिव), रुक्मुदीन (सचिव), हाजी अब्बास (जयसिंहपुर), सिराजुद्दीन सिराज, हारून उमरा, शाकिर लहाबास, उमर (जयसिंहपुर), पहलू सरपंच, मुस्तफा गोकलपुर, अशद (जयसिंहपुर), सुरेन्द्र सिंह, जुनैद पल्ला, अनवर इंजीनियर, डॉ. उस्मान गंगवानी, चौधरी दीना, हसन सरपंच, डॉ. बिलाल, शरीफ पहलवान, तालीम गंगवानी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
