करोडों रूपये के धोखाधडी मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दिया अहम फैैसला
– केनरा बैंक से 363 करोड के धोखाधड़ी मामले में रियल इस्टेट कम्पनी के 4 निदेशकों समेत 6 को कारावास
-सीबीआई पंचकूला के न्यायधीश अनिल यादव ने सुनाया फैसला
City24News/सुनील दीक्षित
कनीना | सीबीआई की पंचकूला स्थित विशेष अदालत ने एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एसआरएस रियल एम्प्लॉइज एस्टेट लिमिटेड के चार निदेशकों और दो वफादारों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है, जिससे केनरा बैंक को 363.80 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार यादव की ओर से जारी किए गए 28 पेज के फैसले में माना गया कि अभियुक्तों द्वारा किए गए अपराध गंभीर अपराध हैं। उन्होने दोषियों के अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक खजाने के लिए दूरगामी परिणामों के साथ ‘सफेदपोश अपराध’ और बुढ़ापे, बीमारी व लंबे समय तक रहने के दावों के बावजूद नरमी की अपील को खारिज कर दिया। सीबीआई अदालत ने कंपनी के निदेशकों अनिल जिंदल, बिशन बंसल, राजेश सिंगला और नानक चंद तायल को आईपीसी की धारा 420,धोखाधड़ी के तहत पांच साल के कठोर कारावास और धारा 120बी, 468 और 471 आईपीसी के तहत चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सभी सजा एक साथ चलेंगी। इतना ही नहीं अदालत ने प्रत्येक दोषी पर प्रत्येक मामले में 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है जिसे न चुकाने पर उन्हें एक महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। दो अन्य आरोपी कर्मचारी सीमा नारंग और धीरज गुप्ता भी शामिल हैं।
कंपनी मेसर्स एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड को कुल 50,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि कंपनी की ओर से अनिल जिंदल को जुर्माना भरना होगा, यह देखते हुए कि कंपनी रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड के अनुसार वह निदेशक बने रहेंगे।
आरोपियों की ओर से दी गई दलील व नरमी का विरोध करते हुए सीबीआई ने तर्क दिया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश, जाली चालान, फर्जी बिक्री और खरीद लेनदेन और सेल कंपनियों के उपयोग के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया था। अभियोजन पक्ष ने प्रस्तुत किया कि इस तरह के आर्थिक अपराध ‘पूरे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं’। अदालत ने फैसले में वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में सख्त सजा के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला भी दिया है। सीबीआई अदालत मिशन ने पूरे प्रकरण में पाया कि आरोपियों ने न केवल बैंकों को धोखा देने के लिए बल्कि आवास परियोजनाओं के नाम पर आमजन को धोखा देने के लिए चतुराई पूर्वक साजिश रची थी। अदालत ने यह भी कहा कि कई दोषी ऐसे ही आरोपों से जुड़े दर्जनों से सैकड़ों अन्य आपराधिक मामलों का सामना कर रहे थे।
