59 लाख 28 हजार का सरकारी खजाना लूटा, अध्यापक के यूनिक कोड से डीडीओ-मैसेंजर ने की चौपट ,लाखों की धोखाधड़ी, एफआईआर दर्ज।

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City24News/अनिल मोहनिया
नूंह | नूंह जिले में सरकारी स्कूल के अंदर चल रहा एक बड़ा वेतन घोटाला आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया। इस मामले में बिछोर थाना पुलिस ने 59 लाख 28 हजार रुपये से अधिक के गबन के मामलें में एफआईआर दर्ज की है । 

शिकायतकर्ता गणित अध्यापक हामिद हुसैन के मुताबिक वे वर्ष 2009 से 11 सितंबर 2017 तक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सिंगार पुन्हाना में तैनात रहे। सितंबर 2017 में उनका ट्रांसफर झारोकरी हो गया। उसके बाद उन्होंने सिंगार स्कूल से एक पैसा भी एरियर, एलटीसी या शिक्षा भत्ते के नाम पर नहीं लिया। लेकिन जब 2018 में उन्होंने अपनी सैलरी स्लिप निकलवाई तो दंग रह गए। उनके यूनिक कोड का इस्तेमाल करके मार्च 2018 में ही 2 लाख 20 हजार 183 रुपये एरियर और 16 हजार 500 रुपये शिक्षा भत्ता निकाल लिया गया था। दोनों बार खाता नंबर और नाम बदलकर पैसा एचडीएफसी व आईडीबीआई बैंक के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

इससे भी बड़ा झटका तब लगा जब पता चला कि जून 2016 में उनकी 2016-19 ब्लॉक की एलटीसी के 49 हजार 140 रुपये भी बिना आवेदन के ही मेसेंजर वाहिद अहमद के खाते में डाल दिए गए थे। जब नई स्कूल के डीडीओ ने एलटीसी निकलवाने की कोशिश की तो सिस्टम ने बता दिया कि एलटीसी पहले ही निकल चुकी है। पूछताछ पर सिंगार के डीडीओ मोहम्मद अली और मैसेंजर वाहिद अहमद ने फर्जी चालान दिखाया, जिसमें सिर्फ 25 रुपये की रसीद थी। बाद में डर के मारे वाहिद अहमद ने हामिद हुसैन को नकद 49 हजार रुपये लौटा दिए और कहा कि नया चालान बनवा लो, मैं खुद खजाने से निकाल लूंगा। आरोप है कि तत्कालीन डीडीओ उर्दू लेक्चरर मोहम्मद अली और मेसेंजर वाहिद अहमद ने मिलीभगत से न सिर्फ उनका बल्कि कई अन्य कर्मचारियों का भी इसी तरह यूनिक कोड बदल-बदल कर लाखों रुपये का गबन किया। कुल राशि 59 लाख 28 हजार 224 रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही है। यह शिकायत हामिद हुसैन ने सबसे पहले 4 जुलाई 2018 को ही प्रिंसिपल, बीईओ, डीईओ से लेकर शिक्षा निदेशालय पंचकुला तक कर दी थी । आखिरकार 28 नवंबर को एसपी ऑफिस नूंह के निर्देश पर बिछौर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। इस मामले में मोहम्मद अली तत्कालीन डीडीओ और वाहिद अहमद मेसेंजर, एसएस मास्टर को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से मांग है कि सिंगार स्कूल के 2016 से 2019 तक के सारे वित्तीय रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच हो ताकि अन्य पीड़ितों का भी पता चल सके। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।

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